Skip to main content

Posts

Showing posts with the label हिंदी लेख

सुखी परिवार के सात लक्षण

  परमेश्‍वर चाहता है कि हमारा परिवार सुखी हो। आज हम सुखी परिवार के सात लक्षण देखेंगे , लेकिन इसका मतलब यह नही की लक्षण सात ही है। जैसे जैसे आप और नई बातें सीखेंगे आप इसमें जोडते जाएं। निम्‍न बिन्‍दुओं पर गौर करें। संक्षिप्‍त में विवरण भी दिए गएं है। 1. स्‍नेह परिवार में स्‍नेह भावना आवश्‍यक है। परमेश्‍वर चाहता है कि परिवार ही स्‍नेह का सर्वोत्‍तम स्‍थान बनें। जब परिवार में इसकी कमी होती है तो सदस्‍य घर से बाहर स्‍नेह की तालाश करते है जिसके कारण परिवार की मजबूती ज्‍यादा नही रह पाती है। 2. समझ आपसी मतभेद के बावजूद एक दूसरे को समझने का प्रयास करना अतिआवश्‍यक है। कई बार सदस्‍य एक दूसरे पर दोश लगाने लगते है कि वे समझते नही या ये समझते नही। दोश लगाने से कुछ भला नही होता। समझ प्रेम और विश्‍वास का बंधन है। 3. समर्पण परिवार मे लक्ष्‍य एवं समर्पण की भावना होना चाहिए। समर्पण आपसी हो और लक्ष्‍य पर केंद्रित हो। यहोशु को याद करे जिसने कहा कि वह अपने घराने समेत ईश्‍वर की सेवा करेगा। समर्पण एवं कर्तव्‍य निष्‍ठा साथ साथ चलते है। घर के अध्‍यक्ष का परिवार के लिए कुछ लक्ष्‍य रखें है। ईश्‍वर भी जगत मे...

मसीही आचार संहिता

परिवार में माता-पिता के लिए निर्देश 1. अपने बच्‍चे को प्रोत्‍साहित करें “ हे बच्चेवालों , अपने बालकों को तंग न करो , न हो कि उन का साहस टूट जाए ” (कुलु 3:21) उनके साहस को न तोडें। उन्‍हें उदास , हताश , चिडचिडा ,  छोटा , नीचा , या घटिया मेहसूस होने न दें। उन्‍हें अच्‍छी अच्‍छी वस्तुऐं दें , जैसा हमारा पिता परमेश्‍वर भी हमें प्रेम से सारी वस्‍तुऐं देता है। (लूका 11:11-13) 2. जब बच्‍चे जवान है तभी उन्‍हें अनुशासन सिखादें । “ जबतक आशा है तो अपने पुत्र को ताड़ना कर , जान बूझकर उसका मार न डाल ” (नीति 19:18) अनुशासन की शिक्षा देना प्रेम की ही निशानी है ” ( इब्रा 12: 6:10) 3. प्रभु की शिक्षा , और चितावनी देते हुए , उन का पालन- पोषण करो। और हे बच्चेवालों अपने बच्चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा , और चितावनी देते हुए , उन का पालन- पोषण करो।। (इफि 6:4)   - उन्‍हें शिक्षा दें “ लड़के को शिक्षा उसी मार्ग की दे जिस में उसको चलना चाहिये , और वह बुढ़ापे में भी उस से न हटेगा। ” (नीति 22:6) “ और बालकपन से पवित्र शास्त्रा तेरा जाना हुआ है , जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्र...