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Couple of Renderings from Kamayani, the Great Hindi Epic

Kama-1, Kamayani. Jai Shankar Prasad मैं देख रहा हूँ जो कुछ भी वह सब क्या छाया उलझन है? सुंदरता के इस परदे में क्या अन्य धरा कोई धन है? Is my vision of all I see a shadowy snare? Or, the veil of beauty has some treasure unaware? Kama-2 "यह नीड़ मनोहर कृतियों का यह विश्व कर्म रंगस्थल है, है परंपरा लग रही यहाँ ठहरा जिसमें जितना बल है। This world is a play theatre of nesty pleasant works, The governing principle is that the strongest remain on earth देखा तो सुंदर प्राची में अरूणोदय का रस-रंग हुआ। Behold in the beautiful east the joyous blushing of the dawn!

He will be called Wonderful (Isaiah 9:6)

"He will be called Wonderful" (Isaiah 9:6) 1. His NAME is Wonderful (Judges 13:18) 2. His WORKS are Wonderful (Psalm 111:2-4) 3. His WORDS are Wonderful (Psalm 119:129) 4. He HIMSELF is Wonderful (Isaiah 28:29) He is Wonderful in Wisdom and Counsel उसका नाम अद्भुत...रखा जाएगा (यशायाह 9:6) 1. उसका नाम अद्भुत है (न्‍यायियों 13:18) 2. उसके काम अद्भुत है (भजन 111:2-4) 3. उसके वचन अद्भुत है (भजन 119:129) 4. वह स्‍वयं अद्भुत है (यशायाह 28:29) वह बुद्धि और युक्ति में अद्भुत है।

मसीही नीतिशास्‍त्र, परिवार और समाज में

मसीही आचार संहिता  परिवार में माता-पिता के लिए निर्देश 1. अपने बच्‍चे को प्रोत्‍साहित करें हे बच्चेवालों, अपने बालकों को तंग न करो, न हो कि उन का साहस टूट जाए। (कुलु 3:21) उनके साहस को न तोडें। उन्‍हें उदास, हताश, चिडचिडा, छोटा, नीचा, या घटिया मेहसूस होने न दें। उन्‍हें अच्‍छी अच्‍छी वस्तुऐं दें, जैसा हमारा पिता परमेश्‍वर भी हमें प्रेम से सारी वस्‍तुऐं देता है। (लूका 11:11-13) 2. जब बच्‍चे जवान है तभी उन्‍हें अनुशासन सिखादें । जबतक आशा है तो अपने पुत्र को ताड़ना कर, जान बूझकर उसका मार न डाल। (नीति 19:18)। अनुशासन की शिक्षा देना प्रेम की ही निशानी है। ( इब्रा 12: 6:10) 3. प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन- पोषण करो। और हे बच्चेवालों अपने बच्चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन- पोषण करो।। (इफि 6:4) - उन्‍हें शिक्षा दें लड़के को शिक्षा उसी मार्ग की दे जिस में उसको चलना चाहिये, और वह बुढ़ापे में भी उस से न हटेगा। (नीति 22:6) और बालकपन से पवित्र शास्त्रा तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बु...

इब्राहीम के समय का ऊर नगर

बाईबिल मे निर्दिष्‍ट ऊर दक्षिण मिसुपुतामिया में स्थित है। 1922 में सर लियोनार्ड वूल्‍ले के इस पुरातन नगर की खुदाई से पहले, बाईबिल में इस नगर का उल्‍लेख संदेहवादियों का खंडण और आलोचन का वस्‍तु बना रहा। लेकिन वर्ष 1922 से 1934 के दौरान इस स्‍थान में किये गए खुदाई ने न केवल इस पुरातन नगर के अस्तित्‍व को सिद्ध कर दिया परन्‍तु उस समय के उन्‍नत सभ्‍यता को भी उजागर किए है। आज यह स्‍थान पुरातत्‍व सम्‍बन्‍धी मण्‍डल में टेल एल-मुकय्यर (Tell el-muqayyar) के नाम से जाना जाता है, जो इराक में पाया जाता है।   ऊर नगर के खंडहर फारस की खाडी पर फरात नदी के मुख पर स्थित एक बन्‍दरगाह हाने के कारण, ऊर नगर उस समय विश्‍व का सबसे उन्‍नत और ऐश्‍वर्यपूर्ण नगर के रूप में उभरा। खुदाई मे दौरान पाये गए रत्‍न, आभूषण, शस्‍त्र (रत्‍नों से अलंकृत), मकान, मिनार, इत्‍यादी इस नगर के वैभव और समृद्धि की ओ इशारा करते है। पुरातत्‍वेत्‍ता जे ए थॉम्‍पसन के अनुसार इस नगर का शासन पद्धति जटिल और वाणिज्‍य रीती सुविक्‍सित था। यहा तक की रसीद, इकरारनामा इत्‍यादी उद्देश्‍यों के लिए लिखावट का उपयोग किया जाता था। इस नगर में नालियां, ...

विकासवाद की समस्‍याएं

विकिपीडिया के अनुसार विकासवाद (Evolutionary thought) की धारणा है कि समय के साथ जीवों में क्रमिक-परिवर्तन होते हैं। जीवों में वातावरण और परिस्थितियों के अनुसार या अनुकूल कार्य करने के लिए क्रमिक परिवर्तन तथा इसके फलस्वरूप नई जाति के जीवों की उत्पत्ति को क्रम-विकास या उद्विकास (Evolution) कहते हैं। क्रम-विकास एक मन्द एवं गतिशील प्रक्रिया है जिसके फलस्वरूप आदि युग के सरल रचना वाले जीवों से अधिक विकसित जटिल रचना वाले नये जीवों की उत्पत्ति होती है। जीव विज्ञान में क्रम-विकास किसी जीव की आबादी की एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के दौरान जीन में आया परिवर्तन है। हालांकि किसी एक पीढ़ी में आये यह परिवर्तन बहुत छोटे होते हैं लेकिन हर गुजरती पीढ़ी के साथ यह परिवर्तन संचित हो सकते हैं और समय के साथ उस जीव की आबादी में काफी परिवर्तन ला सकते हैं। यह प्रक्रिया नई प्रजातियों के उद्भव में परिणित हो सकती है। दरअसल, विभिन्न प्रजातियों के बीच समानता इस बात का द्योतक है कि सभी ज्ञात प्रजातियाँ एक ही आम पूर्वज (या पुश्तैनी जीन पूल) की वंशज हैं और क्रमिक विकास की प्रक्रिया ने इन्हें विभिन्न प्रजातियों मे विकसित किया...

त्रिएकता की महत्‍वपूर्णता

संजयनगर त्रिएकता का सिद्धांत बाईबल में बडा महत्‍व रखता है। यह न केवल तर्कसंगत है बल्कि बाईबल आधारित है। 1. त्रिएकता सदगुण का आधार है सदगुणों का अस्तित्‍व आनादीकाल से है। वे अनंत है इस कारण से निरपेक्ष्‍ा है। वे अनंत इस लिए है क्‍यों कि उनका अस्तित्‍व त्रिएकता परमेश्‍वर में है। परमेश्‍वर निर्गुण नही है। अगर वैसा होता तो भलाई और बुराई, शुभ एवं अशुभ का कोई शास्‍वत अर्थ नही रहता। बाईबल बताती है कि परमेश्‍वर प्रेम है। और प्रेम अनेकता में एकता का सदगुण है। यदी परमेश्‍वर जगत के निर्माण से पहले अकेला ही होता तो प्रेम अर्थहीन होता क्‍योंकि फिर वह किस से प्रेम करता। फिर प्रेम स्‍वयं एक लौकिक आवश्‍यकता बनती और इसका आलौकिक आधार नही होता। अनादीकाल से पिता, पुत्र, एवं पवित्रात्‍मा की एकता ही सदगुण का अनंत आधार है। 2. त्रिएकता संबंध का आधार है भाषा में भी हम तीन व्‍यक्तित्‍व का प्रयोग जानते है। मै, तुम, और वह। अनंतकाल से त्रिएक परमेश्‍वर आत्‍मा का प्रेम के संबंध में एक है। यही एैक्‍य मनुष्‍यों में भी प्रेम पर आधारित रिश्‍तों का आधार है। यह एकता अहम रहित है। यही सच्‍ची संगती और सहभागिता का आधार भी है।...

परमेश्‍वर को सदा धन्‍य कहना

पाठ - भजन 103: 1-5 प्रचारक - डॉ. डामिनिक मारबनियांग स्‍थान - बुढार Psa 103:1 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! Psa 103:2 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। Psa 103:3 वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगोंको चंगा करता है, Psa 103:4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है, Psa 103:5 वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थोंसे तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है।। परमेश्‍वर को सदा धन्‍य कहना। अपने मन को आदेश दें की मन परमेश्‍वर को धन्‍य कहें - क्‍योंकि मन सब से अधिक धोखा देने वाला है - कयोंकि मन परमेश्‍वर को धन्‍यवाद देने से पीछे हट जाता है परमेश्‍वर को धन्‍य कहना है - सम्‍पूर्णता से. जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! यदि कुछ हममे ऐसा है जो उसके पवित्र नाम को धन्‍य नही कह सकता तो आज सम्‍पूर्ण समर्पण की आवश्‍यक्‍ता है। - स्‍मरण करके. उसके किसी उपकार को न भूलना। अपने आप को उसकी भलाई याद दिलाने से स्‍वयं में गवाही हो...

Faith Births Miracles (John 6:1-14)

Text: John 6:1-14 (The Feeding of the Five Thousand) After these things Jesus went over the Sea of Galilee, which is the Sea of Tiberias. Then a great multitude followed Him, because they saw His signs which He performed on those who were diseased. And Jesus went up on the mountain, and there He sat with His disciples. Now the Passover, a feast of the Jews, was near. Then Jesus lifted up His eyes, and seeing a great multitude coming toward Him, He said to Philip, "Where shall we buy bread, that these may eat?" But this He said to test him, for He Himself knew what He would do. Philip answered Him, "Two hundred denarii worth of bread is not sufficient for them, that every one of them may have a little." One of His disciples, Andrew, Simon Peter's brother, said to Him, "There is a lad here who has five barley loaves and two small fish, but what are they among so many?" Then Jesus said, "Make the people sit down." Now there was much grass in the...

The Person of Christ (Masih ka Vyakti)

निकिया के संघोष्टि (345 ईसवी) में अरियस के गलत शिक्षाओं के विरोध में यह धर्मवैज्ञानिक कथन पर मुहर लगा: परमेश्‍वर पुत्र प्रभु यीशु मसीह त्रिएक परमेश्‍वर के हर व्‍यक्ति के साथ 1. सहशास्‍वत 2. सहस्‍वरूप - सहतात्विक 3. सहसमान है। अर्थात कोई किसी से निम्‍न या उच्‍च नहीं। खलसिदोन की संघोष्टि (451 ईसवी) में पादरियों की बैठक ने मसीह के ईश्‍वरीय एवं मानवीय स्‍वभाव के विषय में यह बयान जारी किया: मसीह का ईश्‍वरीय और मानवीय स्‍वभाव 1. अमिश्रित 2. अपरिवर्तनीय 3. अखण्‍ड 4. अविभाजनीय हैं। वह संपूर्णत: ईश्‍वर एवं संपूर्णत: मनुष्‍य हैा उसके देहधारण में न तो दैवीय स्‍वभाव में परिवर्तन हुआ न तो मानवीय स्‍वभाव में कोई परिवर्तन हुआ।

3 Offices of Christ (Masih ke Teen Paden)

मसीह के तीन पदें 1. भविष्यवक्ता मरकुस 6:15; यूहन्ना 4:19; 6:17 वह यशयाह या यर्मयाह समान और एक दूसरा भविष्‍यवक्ता नही। अ. वह भविष्यावाणी का सार है। ‘यीशु की गवाही भविष्यद्वाणी की आत्मा है’ (प्रकाशितवाक्य 19:10)। आ. वह भविष्यीवाणी का स्रोत है। ‘उन्हों ने इस बात की खोज की कि मसीह का आत्मा जो उन में था, और पहिले ही से मसीह के दुखों की और उन के बाद होनेवाली महिमा की गवाही देता था, वह कौन से और कैसे समय की ओर संकेत करता था’ (1पतरस 1:11)। 2. याजक इब्रानियों 2:14-16; 8:3 याजक मनुष्य की ओर से परमेश्वर से भेंट करता हैं। भविष्यवक्ता परमेश्वर की ओर से मनुष्य से बातें करता हैं। अ. वह मनुष्य बना। मनुष्य के लिए परम प्रधान परमेश्‍वर का याजक बनने के लिए उसे मनुष्य बनना पड़ा (इब्रानियों 2:14-16)। आ. वह मध्यस्त बना। वह हमारे लिए निरन्तएर मध्येस्ति करता हैं (रोमियों 8:34; इब्रानियों 7:25)। 3. राजा भजन 110:1-4; जकर्याह 6:13 अ. वह प्रभु है। (फिलिप्प्यिों 2:10) स्वामी, पालनहारा, रक्षक, तारणहारा आ. वह न्यायी है। (रोमियों 2:16; 2तिमोथि 4:1)

Aham Se Uddhar - अहं से उद्धार

रविवार, जुलाई 11, 2010. पेंटिकॉस्‍टल चर्च, इटारसी वक्‍ता: डॉ. डॉमिनिक मारबनियंग ''कुरियन थॉमस के चार दुश्‍मन हैं: संसार, शरीर, शैतान, और कुरियन थॉमस। आखिरी दुश्‍मन सब से खतरनाक हैं।'' -डॉ कुरियन थॉमस कहा जाता है कि लंदन के टाईम मैगज़ीन ने एक बार ''संसार के साथ क्‍या समस्‍या है'' विषय पर कुछ लेख प्रकाशित किये थे। सब से लघु उत्‍तर विख्‍यात लेखक चेस्‍टरटन ने भेजा, और वह इस प्रकार था: आदर्णीय सम्‍पादक महोदय, आपके प्रश्‍न के संबंध में कि ''संसार के साथ क्‍या समस्‍या है'', मै हुँ, आपका जी.के. चेस्‍टरटन एक पादरी साहब रविवार सुबह के लिए संदेश बनाने में व्‍यस्‍त थे। तभी उनका बेटा आकर जिदद् करने लग गया कि ''आओ, पापा, मेरे साथ खेलो''। परेशान हो पिताजी ने एक विश्‍व के मानचित्र को 10 टुकडों में फाड़ कर बेटे को दिया और कहा कि ''जाओ इसे सही कर के लाओं।'' वे सोच रहे थे कि इस से बेटा व्‍यस्‍त हो जाएगा और उनको तैयारी का समय मिल जाएगा। लेकिन बेटा थोडी ही देर में लौट गया, और वह मानचित्र भी सही कर लाया था। चकित हो जब पिता ने ...

4 Guards Over Life -जीवन के चार पहरें – (Proverbs 4:20-27)

Forthcoming in  Satyadoot Magazine , Itarsi, August 2010 संसार में मनुष्य हर बहुमूल्यक बात की सुरक्षा का उपाय करता है। घर के अलमारियॉ, संदूकें, दरवाजें, एवं खिडकियॉ तालों के तले सुरक्षित पाएं जाते ही हैं, साथ ही साथ कुछ लोग अधिक सुरक्षा के लिए पहरेदारों को भी नियुक्त कर देते हैं, क्योंकि हर व्यसक्ति जानता है कि इस संसार में उसकी सुरक्षा की जिम्मेीदारी प्रथमत: उसी पर ही हैं, और यह संसार एक दुष्टक लोक है। लेकिन भौतिक वस्तुतओं से भी अधिक मूल्यंवान मनुष्या के कुछ ऐसी बातें हैं जिनकी सुरक्षा करने में यदी वह विफल हो जाएं तो वह सब कुछ खो देता हैं। इसीलिए पवित्रशास्त्रि हमे चिताता है: हे मेरे पुत्र मेरे वचन ध्यान धरके सुन, और अपना कान मेरी बातों पर लगा। इनको अपनी आंखों की ओट न होने दे? वरन अपके मन में धारण कर। क्योंकि जिनकों वे प्राप्त होती हैं, वे उनके जीवित रहने का, और उनके सारे शरीर के चंगे रहने का कारण होती हैं। सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर? क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है। टेढ़ी बात अपके मुंह से मत बोल, और चालबाजी की बातें कहना तुझ से दूर रहे। तेरी आंखें साम्हने ही की ओर लगी रहें, ...

नववर्ष में निर्भय प्रवेश – New Year Message

© Dr. Matthew K. Thomas, 2010 President of Central India Theological Seminary, Executive Board Member of Pentecostal World Felloship, Chairman of the Fellowship of Pentecostal Churches in India © डॉ. मैथ्‍यू के. थॉमस, 2010 नए वर्ष के प्रारंभ ही में हमने ऐसे त्रासदी भरी घटनाओं के बारे में सुन लिया है, जिससे संसार आज भय के चपेट में आ गया हैं। हाल ही में एक भयानक भूकम्‍प ने हायती देश की राजधानी में ही एक लाख से अधिक लोगों की एक ही दिन में  जान ले ली। फिर कोई आतंकवादी संघटन का मुखिया ने कल ऐलान कर दिया कि उसके पास इतना परमाणु शक्ति है कि वह सारे विश्‍व को पंद्राह मिनटों में नाश कर सकता है। संसार स्‍वयं मौत एवं आतंक का ऐसा खतरनाक समुद्र बन चुका है जिसमें जीवन और भविष्‍य हर वक्‍त समाप्ति के कगार पर ही पाए जाते हैं। ऐसे परिस्थितियों में परमेश्‍वर का वचन हमारे लिए दैवीय सच्‍चाई का वह सीख देता है जो हमें भय के बंधन से मुक्‍त कर ईश्‍वरीय भलाई और करूणा के साथ हमें इस नववर्ष में प्रवेश दिलाता है। इब्रानियों 13:5,6,8 के अनुसार: 'जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्‍योंकि उस ने आप ही क...

Outline of Theology in Hindi - Part I (Introduction and Bibliology)

बाइबिल के प्रमुख सिद्धांत एवं शिक्षाओं की समझ हेतु धर्मविज्ञान प्रणाली की रूपरेखा का इस पहले कडी को पढिये। धर्मविज्ञान प्रणाली की रूपरेखा - भाग 1 by Domenic Marbaniang YOU NEED TO DOWNLOAD KRUTIDEV FONT IN ORDER TO READ THE DOCUMENT You can find the English version at Scribd . GOD BLESS YOU ALL!

ईश्वरीय जीवन का दान

"And this is the testimony: that God has given us eternal life, and this life is in His Son. He who has the Son has life; he who does not have the Son of God does not have life" (1Jn 5:11-12). 1. अद्वितीय जीवन (Adviteeya Jeevan) –  Exclusive Life, Jn.17:3, There’s nothing like it. 2. अनंत जीवन (Ananta Jeevan) –  Eternal Life,  1Jn.5:11,12 (Quality not Duration). 3. अलौकिक जीवन (Alaukika Jeevan) –  Supernatural Life,  1Cor. 15:47-49. 4. आत्मिक जीवन (Aatmika Jeevan) –  Spiritual Life,  Rom. 8:10,11. 5. अमूल्य जीवन (Amulya Jeevan) –  Invaluable Life,  1Pet.1:18,19. Life of His blood. 6. अलोकित जीवन (Alokit Jeevan) –  Illuminated Life,  Jn. 8:12; Jn.1:3; Eph.5:8. 7. अविनाशी जीवन (Avinashi Jeevan) –  Imperishable Life,  1Cor.15:51-53; 2Cor.4:16 8. अमर जीवन (Amar Jeevan) –  Immortal Life,  1Cor.15:25,26,53; Heb. 2:14; Rev.2:11; 20:6. 9. अपरिमित जीवन (Aparimita Jeevan) –  Infinite Life,  boundless, abundant, J...

मेरी माता के पुत्र मुझसे अप्रसन्‍न थे।

'मुझे इसलिए न घूर कि मैं साँवली हूं, क्योंकि मैं धूप से झुलस गई। मेरी माता के पुत्र मुझ से अप्रसन्न थे, उन्होंने मुझ को दाख की बारियोंकी रखवालिन बनाया? परन्तु मैं ने अपनी निज दाख की बारी की रखवाली नहीं की!' (1:6) उपरोक्‍त आयत में शूलेमी अपनी दु:खपूर्ण गाथा सुना रही है। उसका अपने प्रेमी से प्रेम होने की वजह से उसकी माता के पुत्र अर्थात उसके अपने ही भाई अत्‍यधिक नाराज गये, उन्‍होंने उसे दाख की रखवालिन बना दिया। अत्‍यधिक तेज धूप में दाख की रखवाली करने के कारण शूलेमी के शरीर का रंग सांवला हो गया। शूलेमी को अपने ही परिवार के लोगों ने सताया तथा उसके सच्‍चे प्रेम को तोड़ने की कोशीश की। शूलेमी ने तो वफादारी के साथ अपने भाइयों की दाखबारियों की देखभाल की परन्‍तु वह अपनी बारी की रक्षा न कर सकी। जब एक विश्‍वासी मसीह की ज्‍योति में आ जाता है तभी उसे अपने पूर्वजीवन का सारा कालापन दिखाई देता है। तभी सारी कमजोरियां दिखाई देती हैं। शूलेमी की सतावट घर से ही थी। बाहरी पीड़ा से घर की पीड़ा अधिक कष्‍टकर होती है। जो लोग सच्‍चाई के मार्ग में आगे बढ़ना चाहते हैं उन्‍हें घरवाले ही रोकेंगे। यीशु ने भी ...

मैं काली तो हूं

"मैं काली तो हूं परंतु सुन्दर हूं, केदार के तम्बुओं और सुलेमान के पर्दे के तुल्य हूं।" (1:5) इब्रानी भाषा का शब्द जो कालेपन के लिए यहां प्रयोग में लाया गया है वह 'शोरा' है जिस का अर्थ है धूप के कारण आनेवाला कालापन। यह कालापन पुराने पापमय जीवन को दर्शाता है। स्वाभाविक रूप से काली होने पर भी वह ईश्वरीय प्रेम में सुंदर है। मसीह का प्रेम भी परिवर्तन लाने वाला होता है जो हमें अर्थात कलीसिया को सर्वांग सुंदर बना देता है। प्रेमी भी अपनी प्रेमिका को जिस प्रकार सर्वांग स्वीकार करता है ठीक उसी प्रकार प्रभु यीशु मसीह ने कलीसिया को ग्रहण किया है। प्रेमिका अपनी तुलना केदार के तम्बुओं तथा सुलेमान के पर्दों से करती है। यह पवित्र लोगों में पाई जाने वाली पवित्रात्मा की सुन्दरता के तुल्य है। पवित्र लोगों के धर्म के कार्यों की तुलना चिरकाल तक स्थिर रहेगी (प्रकाश. 19: 8)। डॉ. कुरियन थामस की पुस्तक परिणयगाथा से। © Dr. Kurien Thomas, 1989

प्रेमिका की आकांक्षा और संगति

‘मुझे खींच ले, हम तेरे पीछे दौड़ेंगे (श्रेष्‍ठगीत 1:4) संसार, शरीर और शैतान तीनों मिलकर विश्‍वासी के पीछे पीछे दौड़ते हैं कि उसे हरावें परन्‍तु विश्‍वासी की इच्‍छा इस परिस्थिति से भगने की है। वह पाप के पीछे नहीं भागता बल्कि प्रेमी अर्थात प्रभु के पीछे भागता है। दौड़ने वाला जीवन क्रियाशील जीवन है। फिर मसीही विश्‍वासी का दौड़ना कोई अकेला नहीं है, वह मसीह के साथ दौड़ता है। ‘हम तेरे पीछे दौड़ेगे’ ये शब्‍द शुलेमी के नहीं, परन्‍तु यरूशलेम की पुत्रियों का हैं। जब प्रेमिका अपने प्रेमी के पीछे दौड़ेगी तो यरूशलेम की पुत्रियां भी उस्‍के पीछे दौड़ना चाहती हैं। Adapted from Parinaygatha by Dr. Kurien Thomas, Itarsi Copyright © Dr. Kurien Thomas, 1989

परिणयगाथा - प्रेमी का धन्‍य नाम

प्रेमी का धन्य नाम ‘तेरे भांति भांति के इत्रों की सुगन्ध उत्तिम है, तेरा नाम उंडेले हुए इत्र के तुल्यव है; इसीलिए कुमारियां तुझसे प्रेम रखती हैं’ (श्रेष्ठिगीत 1:3) दूल्हे का सम्पूपर्ण जीवन सुगंधमय है। यीशु मसीह जो कि कलीसिया का अद्वैत दूल्हाइ है उसका जीवन भी सुगंध से परिपूर्ण है। उनका जीवन, शिक्षा, कार्य, आदि सब पवित्र आत्मा से ही थे। प्रेयसी अपने प्रेमी के नाम का वर्णन करते हुए कहती है कि उसका नाम उंडेले हुए इत्र के समान है। ठीक इसी प्रकार प्रभु यीशु मसीह ने भी हमारे लिए अपना जीवन उंडेल दिया ताकि हमारा जीवन मसीह की सुंगध से भर जावे (2 कुरि. 2:15)। इसी नाम के द्वारा हमें उद्धार प्राप्तह हुआ तथा समस्तन संसार के लिए भी एक ही नाम दिया गया जिस पर सब जाति के लोग विश्वाेस द्वारा उद्धार पाते हैं। इसीलिए परमेश्वीर ने उसे अतिश्रेष्ठर नाम भी दिया जिसके सामने हर एक घुटना टिकेगा।

परिणयगाथा - अध्‍याय 1 - प्रेम का प्रमोद

प्रेम का प्रमोद ‘वह अपने मुंह के चुम्ब नों से मुझे चूमे ! क्‍योंकि तेरा प्रेम दाखमधु से उत्तम है’ (श्रेष्ठ गीत 1:2) यहूदियों की रीतिरिवाज के अनुसार विवाहोपरान्तउ अंगीकार स्व रूप पति पत्नी एक दूसरे का चुम्ब)न लेते थे। इस चुम्बिन का अर्थ विवाह में एक दूसरे को ग्रहण किये जाने का साक्ष्यि माना जाता था जो अति आवश्यइक होता था। ‘वह अपने मुंह के चुम्बानों से मुझे चूमे ! यह प्रेयसी का अपने प्रेमी के प्रति प्रेम तथा समर्पण को दर्शाता है। चुम्बतन आपस में मेल का बोध है और परस्पसर सहभागिता को दर्शाता है। इन अन्तिम दिनों में परमेश्वनर हमसे किस प्रकार निकटता से बातें करता है तथा परस्पगरता प्रगट करता है। ‘तेरा प्रेम दाखमधु से उत्तम है’ दाखमधु आनन्द का प्रतीक है। ईश्वकरीय प्रेम से ही वास्ताविक आनन्दर प्राप्तब होता है। दाखमधु का तो मूल्यु है परन्तु परमेश्वर के प्रेम का कोई मूल्य नहीं और न ही हमें इसे प्राप्त करने के लिए कुछ खर्च करना पड़ता है और न ही पड़ा था। दाखमधु की एक और बात यह कि यह खट्टा भी हो जाता है, परन्तु मसीह के प्रेम में कभी कोई खट्टापन नहीं आता।