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Path to Perfection (Philippians 3:12)

Message by Pastor Augustine Rao, PCG, Itarsi, Tuesday, July 6, 2010. 7pm पास्‍टर अगस्टिन राव, पी.सी.जी, इटारसी, मंगलवार जुलाई 6, 2010  यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। (फिलि 3:12) Phil. 3:12 - Pressing Towards Perfection 1. परमेश्‍वर के साथ चलने से सिद्ध बनना (Perfection through walking with God, Deut.18:13, Gen.17:1) तू अपके परमेश्वर यहोवा के सम्मुख सिद्ध बना रहना। व्‍यवस्‍था 18:13 मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर हूं? मेरी उपस्यिति में चल और सिद्ध होता जा। उत्‍प 17:1 2. शिक्षा प्राप्‍त करते हुए सिद्ध बनना  (Perfection through learning the truth, through teaching, Col. 1:28) जिस का प्रचार करके हम हर एक मनुष्य को जता देते हैं और सारे ज्ञान से हर एक मनुष्य को सिखाते हैं, कि हम हर एक व्यक्ति को मसीह में सिद्ध करके उपस्थित करें। कुलु 1:28 3. परिपक्‍वता की ओर बढ्ते हुए सिद्ध बनना (Perfection through growing towards maturity, Heb.6:1) इसलिये आओ मसीह की शिक्षा की आरम्भ की बातोंको ...